Friday, 22 April 2011

तुम चले जाओगे

तुम चले जाओगे
 पर थोड़ा-सा यहाँ भी रह जाओगे
 जैसे रह जाती है
 पहली बारिश के बाद
 हवा में धरती की सोंधी-सी गंध
 भोर के उजास में
 थोड़ा-सा चंद्रमा
 खंडहर हो रहे मंदिर में
 अनसुनी प्राचीन नूपुरों की झंकार|

 तुम चले जाओगे
 पर थोड़ी-सी हँसी
 आँखों की थोड़ी-सी चमक
 हाथ की बनी थोड़ी-सी कॉफी
 यहीं रह जाएँगे
 प्रेम के इस सुनसान में|

 तुम चले जाओगे
 पर मेरे पास
 रह जाएगी
 प्रार्थना की तरह पवित्र
 और अदम्य
 तुम्हारी उपस्थिति,
 छंद की तरह गूँजता
 तुम्हारे पास होने का अहसास|

 तुम चले जाओगे
 और थोड़ा-सा यहीं रह जाओगे|