Friday, 22 April 2011

थोड़ी दूर साथ चालो

कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो
 बहुत बड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चालो

 तमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता है
 मैं जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ चलो

 नशे में चूर हूँ मैं भी तुम्हें भी होश नहीं
 बड़ा मज़ा हो अगर थोड़ी दूर साथ चलो

 ये एक शब की मुलाक़ात भी ग़नीमत है
 किसे है कल की ख़बर थोड़ी दूर साथ चलो

 अभी तो जाग रहे हैं चिराग़ राहों के
 अभी है दूर सहर थोड़ी दूर साथ चलो

 तवाफ़-ए-मन्ज़िल-ए-जानाँ हमें भी करना है
 "फ़राज़" तुम भी अगर थोड़ी दूर साथ चलो