Saturday, 30 April 2011

मैं उसे प्यार करता था




मैं उसे प्यार करता था
इतना कि
दूर चला गया उससे
ताकि महसूस कर सकूं
जुंबिश उसकी चाहत की
हर पल

मैं उसे खुश देखना चाहता था
इतना कि
मैंने हटा लीं अपने नजरें
उस पर से
ताकि नजर न आ सके
एक भी आंसू

मैं पाना चाहता था सानिध्य
दूध और पानी जैसा
और मैंने
छुड़ा लिया दामन कि
ये ख्वाब,
बचा ही रहे साबुत

मैं बहुत जोर से हंसना चाहता था
इतनी तेज कि
मेरे भीतर का विषाद
घबराकर दम तोड़ दे
भीतर ही...

मैं बो देना चाहता था खुशियों के बीज
समूची धरती पर
इसलिए उठा लिए हथियार
कि इनसे लडऩे को ही
आतुर हो उठें मुस्कुराहटें


मैं तुम्हें रोकना चाहता था
इसलिए मैंने जाने दिया तुम्हें
ताकि रोकने की उस चाहत को
रोके रह सकूं सीने में
हमेशा...